मेरी अनुमति के बिना इस ब्‍लाग की किसी भी सामग्री का किसी भी रूप में उपयोग करना मना है । ........ देव कान्‍त पाण्‍डेय

शनिवार, 27 अप्रैल 2013

फेसबुकिया जिंदगी


नेट का बिल ढेर सारा बढ गया है      

ऑंख पर चश्‍मा बडा सा चढ गया है 
दोस्‍त कहते हैं, "नहीं उपचार इसका, 
फेसबुक का साया तुम पर पड गया है !
पत्‍नी भी चिंतित नजर आने लगी है 
पूछती है "नैन तो ना लड गया है ? 
प्रेयसी तुमने तो कोई ना बना ली..... ? ! "
..."देव" का बीपी भी अब तो बढ गया है ।

बोलिए अब आप ही हे यूजरों 
इल्‍जाम इतने सर पे मेरे मढ गया है 
कैसे छोडें "रूप की किताब" को 
दिल में जो गहराइयों तक गड गया है । 

                                         ......Devkant Pandey



मंगलवार, 23 अप्रैल 2013

ह्रदय का टूटना भी……….


है कुछ-कुछ सत्‍य और इतना कि ये घटना पुरानी है
जो कहना चाहें तो कह लें,  ये यौवन की नादानी है
बसा रक्‍खी थी आंखों में सुघर तस्‍वीर एक लेकिन
ह्रदय का टूटना भी, जिंदगी की एक कहानी है ।

खुशी में चूर थे, जीवन में रस की धार बहती थी
उसी के ख्‍याल में हर दिन,  हमारी शाम ढलती थी
बसाए ख्‍वाब नैनों में, ह्रदय में हसरतें ढेरों
जो मिलते थे बुलाने पर, तमन्‍नाएं मचलती थीं ।

नजर की नूर थी, हर पल निगाहों में बसा करती
हमारा पक्ष लेकर के, जमाने से लडा करती
तो फिर कैसे यकीं करते नहीं, हम उसकी बातों पे
रहेगा साथ जीवन भर, हमेशा ही कहा करती ।

न जाने क्‍या हुआ सहसा, कि वह मुंह मोड के बैठी
हमारे मिलने-जुलने की, वो आदत छोड के बैठी
हमारी जिंदगी को छोड कर, सुनसान राहों पर
बिना बोले बहुत कुछ यार, रिश्‍ता तोड के बैठी ।

कहा मजबूरियां हैं कुछ, मैं अब संग चल नहीं सकती
तुम्‍हारी भावनाओं की लहर में,  बह नहीं सकती
जो कहना चाहो तुम कह लो मुझे, या बेवफा समझो
तुम्‍हारे साथ बंधन में, नहीं मैं बंध नहीं सकती ।

ह्रदय पर चोट थी गहरी, संभलना हो गया मुश्किल
मेरे हिस्‍से में तन्‍हाई, उसे था मिल चुका साहिल
समय का चक्र तो चलता रहा, रफतार में अपनी
मेरी यादों में, सांसों में, रहा वो हर पहर शामिल ।

मुहब्‍बत क्‍यों हुई रूसवा, अलग वो एक कहानी है
खुले मंचों से गाकर के, नहीं मुझको सुनानी है
सुनेंगे लोग तो कोसेंगे, उसकी बेवफाई को
मुझे उस बेवफा की, बेवफाई भी छुपानी है ।

रहा अब कुछ नहीं बा‍की, खतम अब वो कहानी है 
महज यह गीत ही बाकी बचा उसकी निशानी है 
बदल डाले हैं दिल के भाव, जो प्रतिकूल थे उसके
है मदिरा अब नई, केवल बची बोतल पुरानी है । 
                                  ... Devkant Pandey 

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

दिल्ली के तालकटोरा से उठी भोजपुरी के सम्मान की आवाज

 भोजपुरी समाज दिल्ली द्वारा अपने 56 वें स्थापना दिवस के वसर पर दिनांक 25 नवम्बर 2011  को  दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित स्वाभिमान समारोह में भोजपुरी को अष्टम अनुसूची में शामिल करने का मुद्दा बहुत जोर शोर से उठा . भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष श्री अजीत दुबे ने  समारोह में अष्टम अनुसूची के इस मुद्दे पर बहुत ही प्रभावशाली ढंग से अपनी बात रखी और  कहा कि भोजपुरी को संविधान के अष्टम अनुसूची में शामिल किये जाने का प्रश्न देश और विदेश में रहने वाले 20 करोड़ भोजपुरी भाषियों के  सम्मान और गौरव से जुड़ा प्रश्न है. अब सरकार को इस पर जल्द निर्णय लेना चाहिए. साथ ही उन्होंने भोजपुरी लोक कलाकारों को पद्म सम्मान देने की भी मांग की. बतौर मुख्य अतिथि  आमंत्रित भाजपा सांसद व सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि अपनी मेहनत के बूते भोजपुरी भाषी लोगों ने देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी ताकत को सलाम..। भोजपुरी समाज के लोग स्वाभिमान के साथ जीना जानते हैं। आज नहीं तो कल भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल जरूर किया जाएगा। इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष डा. योगानंद शास्त्री ने कहा कि भोजपुरी क्षेत्र  की हस्तियों ने देश और समाज को नई दिशा दी है । स्थापना दिवस और राष्ट्रीय अधिवेशन के मौके पर मारिशस के पूर्व मंत्री श्री जगदीश गोवर्धन के नेतृत्व में मॉरिशस से लगभग सौ प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वयोवृद्ध गांधीवादी, पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह ने कहा कि भोजपुरी भाषा अपनत्व और भाईचारे की भाषा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल शास्त्री ने भोजपुरी समाज दिल्ली की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रशंसा की इस मौके पर भोजपुरी लोक गायक मनोज तिवारी मृदुल ने भोजपुरी गीत गाकर लोगों का देर रात तक मनोरंजन किया श्री तिवारी ने  कहा कि उनका यह सपना था  कि दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में भोजपुरी का उनका एक भव्य कार्यक्रम होउनका यह स्वप्न आज पूरा हो गया  हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव ने अपने चुटीले अंदाज में लोगों को हंसाया।  इस मौके पर सांसद सर्वश्री नीरज शेखर, धनञ्जय सिंह,  ओमप्रकाश यादव,  दिल्ली के विधायक धर्मदेव सोलंकी, विधायक भरत सिंह, भाजपा नेत्री श्रीमती पूनम आजाद, टी सीरिज के  श्री दर्शन  कुमार आदि मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान महुवा टी वी के  श्री  पी. के. तिवारी,  दैनिक जागरण के श्री   निशिकान्त ठाकुरभोजपुरी गायक और सिने स्टार श्री मनोज तिवारी "मृदुल",  विश्व भोजपुरी सम्मेलन  के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और महामंत्री श्री  सतीश त्रिपाठी व श्री अरुणेश नीरन,मारिशस के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री श्री जगदीश गोवर्धनहिन्दी साहित्यकार श्री केदार नाथ सिंहभोजपुरी  पत्रिका  सन्डे इंडियन के संपादक श्री ओंकारेश्वर  पाण्डेय  एवं  हास्य कलाकार श्री राजू श्रीवास्तव  को भोजपुरी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का संचालन भोजपुरी समाज दिल्ली के वरि. उपाध्यक्ष  श्री प्रभुनाथ पांडेय ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के वरि. उपाध्यक्ष  सर्व श्री गरीब दास, के. राम, उपाध्यक्ष सर्व श्री लल्लन तिवारीहरीश मिश्र,  प्रदीप पाण्डेय,  महामंत्री श्री एल. एस. प्रसादसांस्कृतिक मंत्री श्री वी पी सिंहमंत्री सर्व श्री जितेन्द्र तिवारी एवं राकेश परमार की विशेष भूमिका रही.

मंगलवार, 3 मई 2011

विश्व भोजपुरी सम्मेलन में भोजपुरी के सम्मान की मांग तेज


देवभूमि ऋषिकेश में दिनांक 23-24 अप्रैल को आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मे्लन के दसवें राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान भोजपुरी भाषा, संस्कृति व कला को सम्मान दिए जाने की जोरदार मांग की गई । दिनांक 24 अप्रैल को समापन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री नारायण दत्त  तिवारी ने भोजपुरी भाषा, कला संस्कृति, साहित्य और संगीत की सराहना करते हुए कहा कि भोजपुरी एक तेजस्वी और मधुर भाषा होने के साथ-साथ स्वततंत्रता संग्राम की भी भाषा है । उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आदोलन के दौरान जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानी, जिनमें वे खुद भी शामिल थे, प्राय: एक भोजपुरी क्रांति गीत गाया करते थे जिसके बोल थे "राजा तोरी राजशहिया मिटाए देबो न, साहब तोरी साहबजदिया मिटाए देबो न" । उन्होंने कहा कि यह भोजपुरी भाषा की व्यापकता और प्रभाव का अप्रतिम उदाहरण है ।

कार्यक्रम के इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए भोजपुरी समाज,दिल्ली के अध्यक्ष श्री अजीत दुबे ने पंद्रहवीं लोकसभा में ध्यायनाकर्षण प्रस्ताव के जरिए भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का मुद्दा उठाने हेतु सर्वश्री जगदंबिका पाल, रघुवंश प्रसाद सिंह, संजय निरूपम आदि सांसदों को धन्यवाद करते हुए केन्द्र सरकार से यह मांग की कि नियम 193 के तहत इस मुद्दे को उठाया जाए एवं इसे पास कराया जाए। साथ ही उन्हों ने यह भी कहा कि 1991 के बाद से भोजपुरी लोक गायकों को पदम पुरस्कार प्राप्त नहीं हुए हैं । सरकार को इस ओर ध्यान देते हुए प्रसिद्ध भोजपुरी लोक गायकों यथा मनोज तिवारी, भरत शर्मा व्यास एवं मालिनी अवस्थी आदि जैसे कलाकारों को पदम पुरस्कारों से नवाजा जाना चाहिए ।
           विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय महासचिव श्री अरूणेश नीरन ने विश्व
 भोजपुरी सम्मेलन द्वारा भोजपुरी के विकास और उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि सम्मेलन का उदे्दश्य भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्‍‍कृति के प्रसार-प्रचार के साथ-साथ इस क्षेत्र की प्रतिभाओं को आदर और सम्मान देते हुए उन्हें अनुकूल मंच प्रदान करना भी है । इसी क्रम में उन्हों ने संस्था द्वारा साहित्यिक क्षेत्र की विशिष्ट हस्तियों को दिए जाने वाले सेतु सम्मान एवं लोक संगीत के क्षेत्र में दिए जाने वाले भिखारी ठाकुर सम्मान के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की ।
इस सम्मेलन का उदघाटन 23 अप्रैल को वरिष्ठ भा0ज0पा नेता श्री कलराज मिश्र द्वारा किया गया । इस अवसर पर देश-विदेश से आए तमाम भोजपुरिया लोगों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी भारी संख्या में उपस्थित थे । श्री कलराज मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि भोजपुरी केवल भाषा ही नहीं वरन एक संस्कृति है, यह रहन-सहन की एक पद्धति है । भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के संबंध में उन्हो ने कहा कि इसके लिए प्रयास जारी हैं और आने वाले संसद सत्र में इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया जाएगा।
इस कार्यक्रम के दौरान भोजपुरी साहित्यकार एवं कवि श्री हरिराम द्विवेदी को सेतु सम्मान और प्रख्यात भोजपुरी गायिका श्रीमती मालिनी अवस्थी को भिखारी ठाकुर सम्मान से सम्मानित किया गया । इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान अनेक विषयों पर संगोष्ठियां,कवि सम्मेलन,पुस्तकों के विमोचन आदि के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस सम्पू र्ण आयोजन में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सतीश त्रिपाठी सहित सभी प्रांतीय अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी जैसे सरिता बुधु, डा0 बी0एन0 तिवारी, डॉ अशोक सिंह, श्री अनिल ओझा नीरद, मनोज भावुक, कुलदीप श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव, कमल नारायण मिश्रा, डा0 महेन्द्र प्रताप पाण्डेय "नंद" एवं श्री बी0एन0यादव आदि उपस्थित रहे।

गुरुवार, 31 मार्च 2011

आई.एन.ए. कॉलोनी में होली मिलन समारोह का आयोजन

भोजपुरी समाज,दिल्ली, शाखा: आई.एन.ए. कॉलोनी द्वारा रविवार, दिनांक 27 मार्च 2011 को आई.एन.ए. कॉलोनी में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया । इस समारोह के मुख्‍य अतिथि भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यपालक निदेशक (उत्‍तरी क्षेत्र)श्री पी.अनिल कुमार थे । भोजपुरी समाज,दिल्ली के अध्यक्ष श्री अजीत दुबे(पूर्व कार्यपालक निदेशक,भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण) व्यस्तता के चलते इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके पर उन्होंने शाखा के समस्त पदाधिकारियों को इस आयोजन के लिए बधाई एवं साधुवाद दिया . इस अवसर पर पूर्वांचल सेवा समिति,नेताजी नगर के अध्‍यक्ष श्री पशुपति सिंह व उनकी कार्यकारिणी के सदस्‍य, आर.डब्‍ल्‍यू.ए.,आई.एन.ए.कॉलोनी के महासचिव श्री आलम सिंह एवं पत्रकार श्री मुन्‍ना पाठक भी उपस्थित थे । श्रीमती रंजना भूषण द्वारा प्रस्तुत गणपति वंदना के साथ समारोह प्रारंभ हुआ तत्‍पश्‍चात श्री बनारसी त्रिपाठी,सचिव द्वारा मुख्‍य अतिथि सहित अन्‍य अतिथियों तथा समारोह में उपस्थित लोगों का स्‍वागत किया गया । महिलाओं द्वारा भोजपुरी के पारंपरिक संस्‍कार गीतों की प्रस्तुति के साथ साथ कालोनी के बच्चों द्वारा रंगा रंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों यथा कविता पाठ, नृत्य एवं गायन के अलावा श्री मुन्‍ना पाठक,श्री रविन्‍द्र भूषण, श्री रामकरण पाल, श्री मनीष कुमार द्वारा काव्‍यपाठ किया गया . भोजपुरी समाज,दिल्ली, शाखा: आई.एन.ए. कॉलोनी द्वारा सरस्‍वती पूजा के दौरान आयोजित की गई विभिन्‍न प्रतियोगिताओं के सफल प्रतिभागियों को इस अवसर पर पुरस्‍कार भी प्रदान किए गए । बच्‍चों के कार्यक्रम से गदगद मुख्‍य अतिथि ने अपने भाषण में सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों पर अत्‍यंत प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की तथा आयोजन की सराहना की ।



    श्री विनोद कुमार त्रिपाठी,अध्‍यक्ष भोजपुरी समाज, आई.एन.ए. कॉलोनी ने अपने     अध्‍यक्षीय भाषण में कहा कि महानगर के भागदौड़ भरे माहौल में इस प्रकार के आयोजन हमारे सांस्‍कृतिक उन्‍नयन के लिए जरूरी हैं ।


समाज के कर्मठ पदाधिकारियों श्री रामजीत साह(कोषाध्यक्ष), श्री बनारसी त्रिपाठी (सचिव), श्री शैलेश कुमार (उपाध्यक्ष) एवं श्री राजन पाण्‍डेय (उपाध्यक्ष), श्री देवकांत पांडेय (सांस्कृतिकसचिव) तथा कार्यकारिणी सदस्‍यों सर्वश्री हसमुददीन,के.के.प्रजापति, रामसुमेर यादव, अजय दूबे, मनीष कुमार, अरविन्‍द मेहता, मंगल सिंह, चंद्रमणि पांडेय, दिनेश कुमार, श्याम ठाकुर, शंकर साह एवं श्रीमती बबीता झा, श्रीमती रंजना भूषण आदि के सराहनीय प्रयासों से यह कार्यक्रम सफल हुआ ।

इस सांस्कृतिक कार्यक्रम क़ा संचालन श्री देवकांत पांडेय, सांस्कृतिक सचिव द्वारा किया गया । उपाध्‍यक्ष श्री राजन पाण्‍डेय के धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ ।



बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

आंदोलन विकराल रूप धारण करे इससे पहले आठवीं अनुसूची में शामिल हो भोजपुरी- अजीत दुबे


दिनांक 22 फरवरी 2011 को दिल्‍ली स्‍थित प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया में भोजपुरी समाज दिल्‍ली के सौजन्‍य से प्रेस कांफ्रेस का आयोजन किया गया। यह आयोजन मारीशस के पूर्व स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री    श्री जगदीश गोवर्धन की 50 दिवसीय 'भारत भोजपुरी यात्रा' के परिप्रेक्ष्‍य में उनके प्रयासों एवं उनके विचारों से मीडिया जगत को अवगत कराने के लिए भोजपुरी समाज दिल्‍ली के सौजन्‍य से किया गया । इस प्रेस कांफ्रेस में मारीशस से आए श्री जगदीश गोवर्धन पूर्व स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री, मारीशस सरकार, डा. अखिलानंद रिसाल और उनकी पत्‍नी होशिला देवी रिसाल के साथ-साथ श्री अजीत दुबे, अध्‍यक्ष भोजपुरी समाज दिल्‍ली, डा. नित्‍यानंद तिवारी पूर्व विभागाध्‍यक्ष, हिंदी, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय, श्री ओंकारेश्‍वर पांडेय, संपादक भोजपुरी पत्रिका 'संडे इंडियन', श्री शिवाजी सिंह, अध्‍यक्ष पूर्वांचल एकता मंच दिल्‍ली, श्री प्रभुनाथ पांडेय, वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष भोजपुरी समाज दिल्‍ली, डा. अजय कुमार ओझा, अध्‍यक्ष भोजपुरिया फाउन्‍डेशन व संपादक भोजपुरी मासिक पत्रिका 'वीर भोजपुरिया', श्री कुलदीप कुमार संपादक भोजपुरी वेव साईट 'पूर्वांचल एक्‍सप्रेस' सहित इलेक्‍ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया के तमाम संवाददाता व पत्रकार उपस्थित थे।

अपने संबोधन में श्री जगदीश गोवर्धन ने कहा कि "मनुष्‍य की सबसे महत्‍वपूर्ण व प्रिय भाषा उसकी मातृभाषा है और यह मातृभाषा मनुष्‍य के म‍स्तिष्‍क को सोचने समझने की बेहतर दृष्टि प्रदान करती है । जो अपनी मातृभाषा से दूर हो जाता है वह अपनी पहचान भी खो देता है । भोजपुरी दुनिया भर के 20 करोड. लोगों की मातृभाषा है परन्‍तु आज भी यह भाषा भारत में अपने सम्‍मान से वंचित है । इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना अत्‍यंत अनिवार्य है । इसके लिए समस्‍त भोजपुरी भाषियों और देश विदेश में संचालित समस्‍त भोजपुरी संगठनों को एक साथ एक मंच पर आकर बहुत ही जोरदार ढंग से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी । साथ ही भोजपुरी क्षेत्र के राजनेताओं को बहुत स्‍पष्‍ट रूप से यह संदेश देना होगा कि संसद में भोजपुरी के हक में आवाज बुलंद करने वाले राजनेताओं को ही हमारा मत प्राप्‍त होगा । जब 20 करोड लोग मिलकर एक साथ आवाज उठायेंगे तो भोजपुरी को उसका संवैधानिक हक प्राप्‍त करने से कोई रोक नहीं पाएगा" ।
  अपने अध्‍यक्षीय भाषण में भोजपुरी समाज दिल्‍ली के अध्‍यक्ष श्री अजीत दुबे ने जहॉं एक तरफ श्री जगदीश गोवर्धन पूर्व स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री, मारीशस सरकार को उनकी इस 50 दिवसीय 'भारत भोजपुरी यात्रा' के लिए उन्‍हें साधुवाद एवं बधाई दी वहीं दूसरी तरफ उन्‍होंने भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के संबंध में भोजपुरी समाज दिल्‍ली द्वारा किए गए विभिन्‍न प्रयासों की जानकारी देते हुए यह कहा कि मारीशस जैसे देश में भोजपुरी को संवैधानिक मान्‍यता प्राप्‍त है पर अपने ही देश में भोजपुरी सरकारी उपेक्षा की शिकार है । उन्‍होंने अत्‍यंत जोर देकर कहा कि "इससे पहले कि भोजपुरी भाषा का आंदोलन विकराल रूप धारण करे इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने संबंधी विधेयक संसद के इस सत्र में अवश्‍य पेश होना चा‍हिए ताकि भोजपुरी को इसका अपेक्षित हक मिल सके । यदि ऐसा होता है तो यह न केवल भोजपुरी भाषा की बल्कि 20 करोड भोजपुरी भाषियों के भावनाओं का सम्‍मान होगा । हमारी प्रबल मांग है कि केन्‍द्र सरकार दृढ. रा‍जनीतिक इच्‍छाशक्ति दिखलाते हुए संसद के वर्तमान सत्र में इस विधेयक को अवश्‍य पेश करे"।
  इस अवसर पर बोलते हुए डा. नित्‍यानंद तिवारी, पूर्व विभागाध्‍यक्ष, हिंदी, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय ने कहा कि "भोजपुरी ऐसे लोगों की भाषा है कि जो यह जानते हैं कि संघर्ष और दुख से सफलता कैसे प्राप्‍त होती है । मारीशस में गए गिरमिटिया मजदूर इसके सशक्‍त प्रमाण हैं । इसमें गुण, संख्‍या व प्रभाव की दृष्टि से ऐसा सामर्थ्‍य है कि वह अपना सम्‍मान पा सकती है । अत: भोजपुरी जिसे बोली के रूप में अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मान प्राप्‍त है वह संविधान की भाषा बनने की अधिकारिणी है और इसे इसका हक मिलना चाहिए" ।
    श्री ओंकारेश्‍वर पांडेय, संपादक भोजपुरी पत्रिका 'संडे इंडियन' ने कहा कि "गोरख वाणी से लेकर कबीर तक भोजपुरी इतना प्रभावशाली रही है कि आजादी के समय ही इसे उचित सम्‍मान मिल जाना चाहिए था । आठवीं अनुसूची में दर्ज अन्‍य भाषाओं की तुलना में भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में दर्ज करने का पर्याप्‍त आधार है अत: इसको इसका हक मिलना ही चाहिए" । साथ ही उन्‍होंने समस्‍त भोजपुरी भाषियों से यह अपील भी की कि जनगणना 2011 में भोजपुरी को अपनी मातृभाषा के रूप में दर्ज कराएं ।
श्री शिवाजी सिंह, अध्‍यक्ष पूर्वांचल एकता मंच दिल्‍ली ने कहा कि जब तक तीव्र आंदोलन तथा संघर्ष का रास्‍ता नहीं अपनाया जाता तब तक भोजपुरी को अष्‍टम अनुसूची में दर्ज कराना मुश्किल लगता है ।
    इस अवसर पर श्री जगदीश गोवर्धन, पूर्व स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री, मारीशस सरकार की इस 50 दिवसीय 'भारत भोजपुरी यात्रा' संबंधी स्‍मारिका का विमोचन भी किया गया ।


गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

भोजपुरी के सम्मान की लडाई तेज होगी- मनोज तिवारी

   भोजपुरी गायक व सिने स्‍टार मनोज तिवारी ने कहा है कि " अब यदि भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल कईला में देरी भईल त एकर लडाई तेज होई । 20 करोड़ लोग भोजपुरी भाषा बोलेला, लेकिन सरकार लगातार उनके उपेक्षा कर रहल बा। अब भोजपुरी के खातिर लड़ाई लड़े के परी। पीछे हटे के कौनो सवाल नई खे"। मनोज तिवारी ने यह बात भोजपुरी समाज द्वारा दिनांक २६ दिसंबर २०१० को आयोजित भोजपुरिया शिखर सम्‍मेलन में कही । भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए भोजपुरी समाज के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में दिल्‍ली के भोजपुरी भाषा-भाषी उपस्थित हुए। इसमें सांसद, साहित्‍यकार, गायक, गीतकार, सिने कलाकार, समाजसेवी और बुद्धिजीवी शामिल थे । मनोज तिवारी ने कहा कि आठवीं अनुसूची में कई ऐसी लोकभाषाए हैं, जिसे बोलने वाले महज 20 से 50 लाख के बीच हैं । मैं इनका विरोध नहीं करता, लेकिन यह कहां तक उचित है कि 20 करोड़ लोगों की भाषा को उपेक्षित रखा जाए। भोजपुरी की लड़ाई को अमलीजामा पहनाने के लिए सांसद व फिल्‍म कलाकार शत्रुध्‍न सिन्‍हा भी मौजूद थे। शत्रुध्‍न सिन्‍हा ने कहा कि यदि 15 वीं  लोकसभा चलेगी तो भोजपुरी क़ा मुद्दा उसमें उठेगा । भ्रष्‍टाचार की वजह से 15 वीं लोकसभा का क्‍या होगा कहना मुश्किल है, लेकिन मैं आप लोगों से वादा करता हूं कि जब भी संसद का सत्र चलेगा भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए मैं पटल पर जोरदार ठंग से मांग रखूंगा। मेरे घर का नाम रामायण है और रामायणवासी होने के नाते भोजपुरी को उसका अधिकार दिलाने के लिए मैं वचनबद्ध हूं।
      प्रसिद्ध साहित्‍यकार केदारनाथ सिंह ने कहा कि भोजपुरी हमार घर हौ और हिंदी हमार देश। न घर को छोड़ा जा सकता है और न देश को, इसे सरकार को समझना होगा। वैसे सरकारी संरक्षण से अधिक जरूरी यह है कि भोजपुरी में बढि़या लेखन हो और इस क्षेत्र के बड़े लेखक भोजपुरी में लिखने के लिए आगे आएं।
    कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए भोजपुरी समाज के अध्‍यक्ष अजीत दुबे ने कहा कि 30 अगस्‍त 2009 को भोजपुरी के विषय को कॉलिंग अटेंशन मोशन में सांसद संजय निरुपम, रघुवंश प्रसाद सिंह और जगदंबिका पाल ने संसद में उठाया, जिसके लिए भोजपुरी समाज उनका आभारी है। भोजपुरी स्‍टार मनोज तिवारी के नाम पर हॉलैंड में डाक टिकट जारी हो चुका है, इंटरनेशनल फिल्‍म फेस्टिवल में उनकी फिल्‍म भोजपुरिया डॉन पहुंच चुकी है। देश से बाहर मॉरिशस, सुरिनाम, फिजी जैसे देशों में भोजपुरी व्यापक रूप से बोली जाती है, मॉरिशस में तो इसे संवैधानिक दर्जा भी प्राप्त है, इसके बाद भी सरकार को इस भाषा की सुध नहीं है। सरकार नहीं चेती तो भोजपुरी समाज सड़क पर उतरकर संघर्ष करने को बाध्‍य होगा। यह सिर्फ भाषा के संवैधानिक दर्जे की बात नहीं है, बल्कि भोजपुरी भाषा- भाषियों के मान-सम्‍मान की बात है। इस कार्यक्रम का संचालन प्रभुनाथ पांडेय ने किया। इसमें पूर्व सांसद जितेंद्र सिंह, गोस्‍वामी पुरी, एच.एन. शर्मा, पूर्वांचल एकता मंच के अध्‍यक्ष शिवजी सिंह, वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन के निर्मल सिंह, कारूराम, गरीबदास, पूर्वांचल गण परिषद के निर्मल पाठक,विनयमणि त्रिपाठी, लल्लन तिवारी, मनोज भावुक, एचपी सिंह, एलएस प्रसाद, प्रदीप पांडेय, सनत दुबे,प्रह्लाद सिंह, एपी सिंह, कुलदीप, राकेश परमार आदि भी उपस्थित हुए ।

बुधवार, 16 जून 2010

बैंक ऑफ इंडिया द्वारा राजभाषा समीक्षा बैठक का आयोजन : रिपोर्ट

बैंक ऑफ इंडिया के विभिन्न अंचलों में राजभाषा कार्यान्वयन संबंधी प्रगति की समीक्षा एवं इस विषय में मार्गदर्शन हेतु प्रधान कार्यालय के अनुदेशों के अनुसार आंचलिक कार्यालय, भोपाल द्वारा अपने समस्त अंचलों के राजभाषा अधिकारियों की एक समीक्षा बैठक का आयोजन दिनांक 11-12 जून को बैंक ऑफ इंडिया के स्टाफ प्रशिक्षण महाविद्यालय, अरेरा हिल्स, जेलरोड, भोपाल में किया गया । इस कार्यक्रम का उदघाटन दिनांक 11.06.2010 को बैंक के कार्यपालक निदेशक श्री एम. नरेंद्र की अध्यक्षता में किया गया । कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई । श्री कैलाशचंद्र पंत, मंत्री संचालक, मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, भोपाल इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे । इस अवसर पर प्रधान कार्यालय के महाप्रबंधक श्री नवीन चंद्र खुल्बै भी उपस्थित थे । मुख्य अतिथि श्री पंत का स्वागत बैंक के कार्यपालक निदेशक श्री एम नरेंद्र ने पुष्प गुच्छ से किया । इस अवसर पर बैंक ऑफ इंडिया राजभाषा शील्ड प्रतियोगिता वर्ष 2009 के पुरस्कार भी वितरित किए गए ।इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्री कैलाशचंद्र पंत, मंत्री संचालक, मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, भोपाल ने कहा कि हमें देश के विकास के साथ जुडने की जरूरत है और देश की जड में राजभाषा हिंदी के मदद से ही पहुंचा जा सकेता है । उन्होंने यह भी कहा कि देश में शासक और जनता के बीच एक भाषायी अंतराल सा आ गया है और आज शासक वर्ग की भाषा आम जनता नहीं समझ पाती न ही जनता की भाषा शासक वर्ग ही समझ पाता है । यही कारण है कि विकास की धारा जन-जन तक नहीं पहुंच पाती है । उन्होंने भाषा के अंतराल को दूर करने का आह्वान किया और कहा कि भाषा से आत्मीय प्रेम की जरूरत है और हम संवैधानिक बाध्यता के लिहाज से नहीं बल्कि देश के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करते हुए राजभाषा हिंदी का प्रयोग करें ।इस अवसर पर बैंक के कार्यपालक निदेशक श्री एम. नरेन्द्र ने राजभाषा अधिकारियों को अपने लक्ष्य के प्रति सचेत रहने के लिए कहा और सफल राजभाषा कार्यान्वयन के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने पर जोर दिया और कहा कि राजभाषा अधिकारियों को वित्तीय समावेशन में अपना सक्रिय योगदान देने की आवश्यकता है ।बैंक के महाप्रबंधक श्री नवीन चन्द्र खुल्बै ने बैंक के सर्वांगीण विकास के लिए राजभाषा अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया । स्थानीय प्रधान कार्यालय, भोपाल के महाप्रबंधक श्री मिहिर देव शर्मा ने बैंकिंग का अधिकतम कार्य हिंदी में करने की सलाह दी। बैंक के भोपाल अंचल के आंचलिक प्रबंधक श्री प्रेम कुमार ने कहा कि आज के प्रतियोगिता एवं चुनौती के युग में हिंदी के माध्यम से ही ग्राहकों तक पहुंचना होगा। राजभाषा अधिकारियों की पहुंच सूचना एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से शाखाओं तक होनी जरूरी है ।इस अवसर पर प्रधान कार्यालय राजभाषा विभाग के मुख्‍य प्रबंधक श्री राजकुमार चौहान ने बैठक के उददेश्य की जानकारी दी तथा राजभाषा अधिकारियों से अपेक्षाओं को स्‍पष्‍‍ट किया । उदघाटन कार्यक्रम का संचालन भोपाल अंचल के प्रंबधक (राजभाषा) श्री देव कान्त पाण्डेय ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रधान कार्यालय के वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा) श्री धीरेन्द्र सिं‍ह ने किया।उदघाटन सत्र के बाद पूरे दिन विभिन्न अंचलों में राजभाषा कार्यान्वयन संबंधी प्रगति की समीक्षा की गई एवं इस विषय में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया ।दिनांक 12 जून, 2010 को व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें डा. बी. एन. पाण्डेय, उप निदेशक, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग, क्षे.का.का., भोपाल, श्री पुष्पेंद्र पाल सिं‍ह, विभागाघ्यक्ष, पत्रकारिता विभाग, माखन लाल चतुर्वेदी रा. पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल एवं बैंक ऑफ इंडि‍या स्टाफ प्रशिक्षण महाविद्यालय, भोपाल के संकाय सदस्यं श्री ललित नारंग तथा अनुसंधान अधिकारी, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग, क्षे.का.का., भोपाल श्री हरीश सिंह चौहान एवं श्री उदय प्रताप सिंह, मुख्य प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडि‍या, आंचलि‍क कार्यालय, भोपाल ने राजभाषा संबंधी विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए । उसी दिन सायं काल बैठक का समापन भी किया गया ।यह दो दिवसीय समीक्षा बैठक भोपाल अंचल के प्रंबधक (राजभाषा) श्री देव कान्त पाण्डेय के कुशल समन्वयन तथा स्टाफ प्रशिक्षण महाविद्यालय,भोपाल के प्रशंसनीय सहयोग से अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।

मंगलवार, 26 मई 2009

सांसदों ने कहा " हिलाएंगे संसद"




भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसुची में शामिल कराने के लिए नवनिर्वाचित भोजपुरिया सांसद संसद में पुरजोर तरीके से आवाज उठायेंगें और सांसद संसद हिलाने की तैयारी में हैं. भोजपुरी समाज, दिल्ली द्वारा २२ मई २००९ को नयी दिल्ली, रफी मार्ग स्थित कांस्टियूशन क्लब में भोजपुरी और पूर्वांचल क्षेत्र के नवनिर्वाचित सांसदों का अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया । कार्यक्रम में भोजपुरी समाज, दिल्ली के संरक्षक माननीय मंत्री श्री सुबोध कान्त सहाय (रांची) , श्री महाबल मिश्रा (दिल्ली), सांसद श्री नीरज शेखर (बलिया), सांसद श्री ओमप्रकाश यादव (सिवान), सांसद श्री कमल किशोर (बहराईच), श्री संजय निरूपम (मुंबई), सांसद श्री रेवती रमण सिंह(इलाहाबाद) को सम्मानित किया गया ।इस अवसर पर अपने संबोधन में भोजपुरी समाज, दिल्ली के अध्यक्ष श्री अजीत दुबे ने सांसदों के समक्ष निम्नलिखित 3 प्रस्ताव रखे .1. भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने हेतु प्रयास किया जाए .2. आसाम और महारास्ट्र में रहने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के निवासिओ के खिलाफ इन राज्यों में जो घटनाएँ हुई है, उसे रोकने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों को ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दे.3. भोजपुरी और पूर्वांचल क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ठोस नीति बनाई जाए .उपस्थित सांसदों ने आश्वासन दिया की इस बारे में आवश्यक कारवाई करने के लिए प्रयास किए जाएंगे, खासकर भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने हेतु सभी सांसद मिलकर संसद में यह मुद्दा उठाएंगे और पूरी कोशिश रहेगी की 15 वीं लोकसभा में इस संबंध में प्रस्ताव पास हो जाए.कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात भोजपुरी गायक और अभिनेता श्री मनोज तिवारी "मृदुल" ने अपनी गायकी से शमा बाँध दिया. समारोह में भोजपुरी के पहले मनोरंजन चैनल "महुआ", पहले समाचार चैनल "हमार टीवी", चौदह भाषा में छपने वाली अकेली साप्ताहिक पत्रिका "दि सण्डे इण्डियन" के भोजपुरी संस्करण के संपादक श्री ओंकारेश्वर पाण्डेय, भोजपुरी सुपर स्टार श्री मनोज तिवारी "मृदुल", भोजपुरी गीतकार मोतीलाल मंजुल, नई दुनिया के पत्रकार श्री अजय पाण्डेय और जनसत्ता के राजनीतिक संपादक श्री मनोज मिश्रा को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्रम देके “पूर्वांचल गौरव” से सम्मानित किया गया.कार्यक्रम में भोजपुरी समाज, दिल्ली के पदाधिकारियों और कर्मठ कार्यकर्ताओं जैसे सर्व श्री गरीब दास, मेजर डा. वी. के. सिंह, लल्लन तिवारी, जीतेन्द्र तिवारी, प्रदीप पाण्डेय, परिहार, प्रहलाद, अजय चौबे, मृतुंजय सिंह, देवकांत पाण्डेय आदि सहित अनेक बुद्धिजीवी, पत्रकार, शिक्षक, वकील आदि उपस्थित थे.कार्यक्रम का संचालन श्री प्रभुनाथ पांडेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, भोजपुरी समाज, दिल्ली तथा धन्यवाद प्रस्ताव श्री एल एस प्रसाद, महामंत्री, भोजपुरी समाज, दिल्ली ने किया.

शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2009

वेलनटाईन डे के अवसर पर

प्रेम का दिन मनाओ, बुरा कुछ नहीं,
प्रेम हमको विधाता का वरदान है,
किन्तु सीमित करो ना इसे देह तक,
प्रेम ऐसी सीमाओं से अनजान है ।


प्रेम केवल नही प्रेयसी के लिए,

प्रेम केवल नही स्वखुशी के लिए,
प्रेम बांटो, करो प्रेम की अर्चना,
प्रेम है हठ नही, प्रेम है याचना,
प्रेम पावन हृदय मे खिला फूल है,
जिंदगी की कथा का यही मूल है,
प्रेमियो के लिए प्रेम संजीवनी,
है हमारे लिए ये बनी लेखनी,
प्रेम हारे हुओं का नव-उत्साह है,
पथ से भटके हुओं की नई राह है .

प्रेम का नभ से भी ज्यादा विस्तार है,

प्रेम जीवन है, माझी है, पतवार है,
आज आओ करें प्रेम की वंदना,
प्रेम पर ही टिका आज संसार है.

शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2008

त्रासदी

है हो रहा हिंसा का नंगा नाच सारे देश में,
हैं आततायी फ़िर रहे बेखौफ ढेरों वेश में,
रक्षक हमारे तान कर बन्दूक केवल हैं खड़े,
शासक हमारे अब भी हैं चिर नींद में सोये पड़े,
ये मौत कोई ना मरे यह सोचता ही कौन है,
इस प्रश्न पर तो देश की संसद भी अपनी मौन है।